चेन्नई · तमिल नाडु · भारत · क्रमांक 04 / 05 · 8 मिनट पढ़ें

«करी» का असली अर्थ क्या है

«करी» शब्द अंग्रेज़ी है — तमिल शब्द «करी» से निकला और औपनिवेशिक प्रशासकों ने उसे हर उस भारतीय पकवान के लिए सामान्यीकृत कर दिया जिसमें उन्हें मसाला और तरी दिखी। इसकी उलझन बहुत बड़ी है।

By Ramesh Iyer · Chennai, Tamil Nadu, India · Issue 47, Feature 04

I. «कारी» का असली अर्थ

तमिल पाक-कला में «कारी» एक ख़ास तैयारी का नाम है: मांस, समुद्री भोजन या सब्ज़ियाँ एक पतली, तेज़ मसालेदार तरी में पकती हैं, जिसमें आमतौर पर इमली, सूखी लाल मिर्च और साबुत व पिसे मसालों का एक ख़ास मिश्रण होता है — जो समुदाय और रसोइए के अनुसार बदलता रहता है।

चेट्टिनाड कारी में ऐसे मसाले होते हैं जो अन्य भारतीय पाक-कलाओं में आम नहीं हैं: कलपासी (पत्थर का फूल, एक तरह का लाइकेन), मराठी मोक्कू (सूखे फूल की कलियाँ) और एक मिश्रण जिसमें तीस या उससे ज़्यादा अलग-अलग सामग्री हो सकती है। यह कारी और अंग्रेज़ों ने जो «करी» बाहर भेजी — नाम से एक ही चीज़ हैं। अनुभव से एक नहीं।

II. सांबार क्या है और क्या नहीं है

सांबार दक्षिण भारतीय है। तूअर दाल से बना एक पतला दाल आधारित सूप-स्ट्यू, इमली, टमाटर, सब्ज़ियाँ और सांबार पाउडर — मेथी, धनिया, सूखी लाल मिर्च और घर-घर बदलते मसाले — के साथ। दक्षिण भारतीय थाली — पूरी थाली — का हिस्सा है। बिना सांबार की दक्षिण भारतीय थाली का केंद्र खो जाता है।

क्या सांबार करी है? अंग्रेज़ी परिभाषा के अनुसार, हाँ। पकवान के किसी भी काम के विवरण के अनुसार, नहीं। सांबार सांबार है। यह उत्तर भारतीय करी की जगह नहीं ले सकता। इसमें क्रीम नहीं होती। यह पतला, खट्टा और ख़ास तौर पर — टाला न जा सकने लायक़ — दक्षिण भारतीय है।

III. गीला और सूखा

तमिल नाडु की रसोई एक अंतर करती है जिसे «करी» शब्द मिटा देता है। कुळम्बु गीला होता है — तरी वाला, चावल के साथ। वरूवल सूखा होता है — मांस या मछली जब तक नमी सोख न ले और सतह न कैरामेलाइज़ हो जाए। पोरियल सूखी सब्ज़ी की तैयारी है, कद्दूकस नारियल और मसालों के साथ भुनी हुई।

अंग्रेज़ी इस्तेमाल में तीनों «करी» हैं। हक़ीक़त में ये तीन बिल्कुल अलग पकाने के तरीक़े हैं, जो तीन बिल्कुल अलग बनावटें और खाने के तीन अलग अनुभव बनाते हैं।

IV. नारियल दूध का सवाल

दक्षिण भारतीय रसोई नारियल दूध का इस्तेमाल इस तरह करती है जैसा उत्तर भारतीय नहीं करती। यह पकवान में चर्बी और तरल दोनों के रूप में आता है, और वही गाढ़ापन देता है जिसके लिए उत्तर भारत में क्रीम और घी इस्तेमाल होते हैं। केरल का फिश मोइली तकनीकी तौर पर करी ही है। पर वह पंजाबी चिकन टिक्का मसाला से हर पैमाने पर बिल्कुल अलग है — चर्बी का स्रोत, मसाला, बनावट, रंग, स्वाद।

«करी» शब्द उनमें अंतर नहीं करता। इन्हें पकाना ही बताता है कि असल में ये क्या हैं।

V. एक ज़्यादा काम की परिभाषा

करी ऐसी तैयारी है जिसमें अलग-अलग मसालों को — साबुत या पिसा हुआ — तड़के, भूनने या दोनों के ज़रिए एक स्वाद-नींव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, आमतौर पर सुगंधित चीज़ों, एक खटास और एक तरल के साथ मिलाकर, जिससे तरी वाला पकवान बने। इसमें सांबार आता है, बिरयानी नहीं; चेट्टिनाड कारी आती है, सूखी वरूवल नहीं।

फिर भी यह काफ़ी नहीं। «करी का अर्थ क्या है» का ईमानदार जवाब है: इसका अर्थ क़रीब हज़ार चीज़ें हैं, और इन सबको पकाते हुए पार करने में हममें से किसी के पास उतना समय नहीं।

Recipe — सांबार · तमिल केंद्र

रमेश अय्यर · चेन्नई · 4 लोगों के लिए · 45 मिनट · चावल के साथ

सामग्री

सांबार पाउडर

तड़का

The method

  1. तूअर दाल को ख़ूब सारे पानी में बहुत नरम और बिखर जाने तक पकाएँ। आधी-अधूरी मसल लें।
  2. इमली के पानी में सब्ज़ियाँ नरम होने तक उबालें।
  3. पकी दाल, कटे टमाटर, हल्दी, सांबार पाउडर और नमक डालें। 15 मिनट तक धीमी आँच पर पकाएँ, जब तक सब एक हो न जाए।
  4. तड़का: तेल गरम होने तक चढ़ाएँ। राई डालें — चटकेगी। करी पत्ते, सूखी मिर्च और हींग डालें।
  5. तड़का तुरंत सांबार पर डालें। वही चटकने की आवाज़ ही पकवान है।
  6. चावल पर परोसें, या इडली के साथ, या दोसा के साथ।

About the contributor

Ramesh Iyer

रमेश अय्यर चेन्नई, तमिल नाडु, भारत से दक्षिण भारतीय पाक-कला और तमिल नाडु की भोजन-परंपराओं पर लिखते हैं। उनके मुताबिक़ «करी» शब्द आपके लिए लगभग कुछ नहीं करता।

Editor’s notes — the longer view

करी पत्ते के बारे में। Murraya koenigii — तमिल में «करुवेपिल्लै» — तेजपत्ते का विकल्प नहीं है और «करी पाउडर» से उसका कोई रिश्ता नहीं। यह अपनी ही चीज़ है, जिसमें खट्टी-राल वाली एक गंध है जो दक्षिण भारतीय तड़के की पहचान बन जाती है। ताज़ा इस्तेमाल करें, ज़्यादा अच्छा हो रसोई की खिड़की पर रखे पौधे से।

इमली के बारे में। दक्षिण भारतीय खटास इमली से आती है, नींबू या सिरके से नहीं। डिब्बेबंद गाढ़ा गूदा चल जाएगा; सूखी इमली भिगो कर गूदा निकालना और बेहतर है। स्वाद से तय करें — कम हुआ तो पकवान सपाट, ज़्यादा हुआ तो आक्रामक।

तड़के के बारे में। साबुत मसालों को गरम तेल में जगाकर, परोसने से ठीक पहले पकवान पर डाल देना — यही दक्षिण भारतीय रसोई का हस्ताक्षर है। उसी की चटकार उसकी घोषणा है। यह सजावट नहीं, पकाने का अंतिम चरण है।

शब्द के बारे में। मैं आपसे «करी» कहना छोड़ देने को नहीं कह रहा। मैं इतना कह रहा हूँ कि जब आप यह कहें, तो जानें कि आप एक पूरे महाद्वीप के खान-पान के लिए एक ब्रिटिश शॉर्टहैंड बोल रहे हैं। रसोइए जानते हैं। अब आप भी जान गए।

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